विज्ञान का चमत्कार: सिर्फ 6 दिनों में खुद को नष्ट करने वाला "लिविंग प्लास्टिक"
आज के समय में प्लास्टिक प्रदूषण पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुआ है। एक तरफ जहां पारंपरिक प्लास्टिक को पूरी तरह गलने में 400 से 500 साल का समय लगता है, वहीं वैज्ञानिकों ने एक ऐसा जादुई और ईको-फ्रेंडली "लिविंग प्लास्टिक" (Living Plastic) तैयार कर लिया है, जो सिर्फ 6 दिनों में खुद-ब-खुद नष्ट हो सकता है।
यह आविष्कार आने वाले समय में प्लास्टिक के कचरे से हमेशा के लिए मुक्ति दिला सकता है। आइए जानते हैं कि यह तकनीक क्या है और कैसे काम करती है।
क्या है यह "लिविंग प्लास्टिक"?
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, सैन डिएगो (UC San Diego) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा थर्मोप्लास्टिक पॉलीयूरेथेन (TPU) विकसित किया है, जिसके निर्माण के समय ही उसमें बैक्टीरिया के बीजाणु (Bacterial Spores) मिला दिए जाते हैं। चूंकि इस प्लास्टिक के अंदर जीवित बैक्टीरिया के अंश मौजूद रहते हैं, इसीलिए इसे "लिविंग प्लास्टिक" या जीवित प्लास्टिक कहा जा रहा है।
कैसे काम करती है यह "सेल्फ-डिस्ट्रक्ट" तकनीक?
यह प्लास्टिक बिल्कुल किसी साइंस-फिक्शन फिल्म की तरह काम करता है:
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सोती हुई अवस्था (Dormant State): जब तक यह प्लास्टिक आपके इस्तेमाल में है (जैसे जूते के तलवे, फोन केस या पैकेजिंग मटेरियल के रूप में), तब तक इसके अंदर के बैक्टीरिया निष्क्रिय यानी सोती हुई अवस्था में रहते हैं। इस दौरान प्लास्टिक सामान्य रूप से मजबूत और टिकाऊ रहता है।
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जागने का ट्रिगर (The Trigger): जब इस प्लास्टिक का काम खत्म हो जाता है और इसे कचरे या खाद (Compost) के ढेर में फेंका जाता है, तो वहां की नमी और पोषक तत्व इसके लिए "ट्रिगर" का काम करते हैं।
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6 दिनों में खात्मा: नमी मिलते ही बैक्टीरिया जाग जाते हैं और प्लास्टिक को खाना (Consume) शुरू कर देते हैं। मात्र 6 से 15 दिनों के भीतर यह प्लास्टिक 90% से ज्यादा पूरी तरह टूटकर जैविक कचरे में बदल जाता है।
किस बैक्टीरिया का हुआ है इस्तेमाल?
इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने बेसिलस सब्टिलिस (Bacillus subtilis) नाम के एक सुरक्षित बैक्टीरिया का उपयोग किया है। यह वही बैक्टीरिया है जिसका इस्तेमाल मिट्टी को उपजाऊ बनाने और कुछ खाद्य पदार्थों (जैसे जापानी नाटो) को बनाने में किया जाता है। वैज्ञानिकों ने इसे इस तरह विकसित किया है कि यह प्लास्टिक बनाते समय निकलने वाली अत्यधिक गर्मी (लगभग 135°C) को भी आसानी से सहन कर जाता है और मरता नहीं है।
यह खोज दुनिया के लिए क्यों जरूरी है?
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माइक्रोप्लास्टिक से मुक्ति: सामान्य प्लास्टिक टूटकर छोटे-छोटे जहरीले कणों (Microplastics) में बदल जाता है जो हमारे पानी और भोजन में मिलकर कैंसर जैसी बीमारियां फैलाते हैं। लेकिन यह लिविंग प्लास्टिक पूरी तरह प्राकृतिक रूप से नष्ट होता है, जिससे कोई जहर नहीं फैलता।
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रीसाइक्लिंग की झंझट खत्म: इस प्लास्टिक को रीसायकल करने के लिए बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों की जरूरत नहीं है, यह कचरे के ढेर में खुद ही नष्ट हो जाता है।
🔍 रिसर्च सोर्स (Scientific Sources):
यदि आप इस रिसर्च के बारे में और अधिक तकनीकी जानकारी पढ़ना चाहते हैं, तो इसके मुख्य सोर्स निम्नलिखित हैं:
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मुख्य रिसर्च पेपर (Nature Communications Journal):
यह शोध प्रसिद्ध वैज्ञानिक पत्रिका Nature Communications में प्रकाशित हुआ है।
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शीर्षक: "Biocomposite thermoplastic polyurethanes containing bacterial spores as self-destroying fillers"
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संस्थान: यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन डिएगो (UC San Diego).
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यूनिवर्सिटी ऑफिशियल रिलीज:
UC San Diego की आधिकारिक विज्ञान और इंजीनियरिंग विंग (Jacobs School of Engineering) द्वारा जारी की गई प्रेस रिलीज, जिसमें प्रोफेसर जॉन पोकोर्स्की (Jon Pokorski) और उनकी टीम के इस आविष्कार की पुष्टि की गई है।